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महात्मा गांधी के प्रथम सत्याग्रही,आध्यात्मिक शिष्य और भूदान आंदोलन के प्रणेता – विनोबा भावे।

 महात्मा गांधी के प्रथम सत्याग्रही,आध्यात्मिक शिष्य और भूदान आंदोलन के प्रणेता – विनोबा भावे। विनायक नरहरि भावे‘विनोबा भावे’जिन्हें महात्मा गांधी ने 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के लिए पहला सत्याग्रही चुना था । यही वह पहली घटना है ,जिसने लोगों का ध्यान विनोबा की तरह खींचा था ।महात्मा गांधी के अध्यात्मिक विरासत के सच्चे शिष्य विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र के गागोदा गांव में हुआ था। विनोबा भावे न सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता और भूदान आंदोलन के प्रणेता भी थे। कम्युनिटी लीडरशिप के लिए उन्हें रेमन मैग्सेस पुरस्कार से  सम्मानित किया गया था ।वह इस श्रेणी में यह पुरस्कार जीतने वाले पहले व्यक्ति थे। विनोबा भावे ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और असहयोग आंदोलन में भी शामिल हुए थे।सरकार ने उन पर ब्रिटिश शासन के विरोध का आरोप लगाकर जेल में भेज दिया।बंदी जीवन में विनोबा जी ने साहित्य साधना की और तीन महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी थी,जिनमें ‘स्वराज्य शास्त्र’,‘स्थितप्रज्ञ दर्शन’,और ईशा वास्य वृत्ति’ प्रमुख रचनाएं थी। गांधी जी ...

लोगों की आस्था की प्रतिमूर्ति है– हमारे राम।

हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता।। लगभग 500 वर्ष पूर्व कही गई यह बात आज भी उतनी ही सार्थक,उचित और प्रासंगिक है। जितनी वह तब थी। भगवान राम की कथा विभिन्न प्रकार से हजारों वर्षों से कहीं जा रही है।भगवान राम युगों - युगों से हमारे देश ही नहीं बल्कि दूनिया के अनेक देशों में जन आस्था के केंद्र में रहे हैं। देश दुनिया के संतों, चिंतकों और विचारकों ने राम पर बहुत कुछ लिखा है। महर्षि वाल्मीकि, तुलसीदास, संत कबीर से लेकर गुरुनानक देव,मीरा, महाकवि केशव, निराला, मैथिलीशरण गुप्त, महात्मा गांधी आदि सब ने अपने-अपने ढंग से लिखा है। युगों- युगों से राम नाम की आस्था का प्रवाह अविरल रहा है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में राम अवतार के उद्देश्य और सिद्धांत को सुंदर ढंग से प्रतिपादित किया है उन्होंने राम को आतिमानवीय रूप में देखा है। गोस्वामी तुलसीदास ने तो राम को सुख-दुख, करुणा, अन्याय से लड़ने के लिए संघर्ष तक करने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में चित्रित किया है उनके राम मानवीय-मूल्यों, मर्यादाओं और आदर्शो के प्रतीक हैं जिनके माध्यम से तुलसी ने नीति, स्नेह, शील, विनय, त्याग जैसे उदा...